क्षणभंगुर संसार
क्षणभंगुर संसार
नील गगन के तले
बेचैनियों का बोझ लिए
शाश्वत कुछ भी नहीं यहाँ
क्यों लिए मृगतृष्णा का झोला
जानते हुए सबकुछ,
है यह क्षणभंगुर संसार...
अदम्य साहस है तेरे अंदर
तभी तो बना सिकंदर
खुद में देख कर अपना प्रतिबिंब
जान पाओगे सूक्ष्म से सूक्ष्मतर
लदो नहीं उलझन से,
है यह क्षणभंगुर संसार...
बर्दाश्त के लिंब पर
पंखों का विस्तार करो
सहनशीलता की फुलवारी में
विचारों की माला बनाकर
पहनो और पहनाओ,
है यह क्षणभंगुर संसार...
पहुँचाओ अपना संदेश
असंख्य उम्मीदों से भिंगोकर
अपेक्षाओं की जलवायु से परे
मिटा दो चिंताओं की बारीक लकीर को
संघर्ष पथ हो साथी तुम्हारा,
है यह क्षणभंगुर संसार...
बहुत सुंदर 👌👌👌👌
जवाब देंहटाएं🙏🙏
जवाब देंहटाएंBahut acha😀😊
जवाब देंहटाएंVery Good 😌😍💕✌🏻
जवाब देंहटाएंखूबसूरत रचना 👌
जवाब देंहटाएं🙏🙏
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर पंक्तियाँ
जवाब देंहटाएंधन्यवाद🙏💕🙏💕
जवाब देंहटाएं👌👌
जवाब देंहटाएं🌹🙏🌹
जवाब देंहटाएंbhut khub 🦋🌹
जवाब देंहटाएं😀😀😀
जवाब देंहटाएं🌺🌹🌺
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